Hindi Poems

इंतज़ार होता है तुम्हारी बाहों का
पर गले मिलती है सिर्फ तनहाई हमको अकेले में

युहीं बरस लेती है आंखें मेरी
कौन कम्भखत केह्ता है गुजरें हुए लम्हें वापस नहीं आते
जैसे चाँद बादलों में लिपट लिपट कर
एक मुस्कान की झलक दे जाता है
उसी तरह मेरी पलकें झपकती हैं
और हर लम्हा जो हमने साथ गुजारा
बस्‍स युहीं लौट आ जाता हैं

कौन केह्ता है कागज़ी कश्ती डूब जाती हैं
हमे तो हर लेहेर मे साहील का एहसास होता है

हाथ थामें मुहब्बत के सहारे कौन नहीं जीना चाहता
हाय बस यहीं खयाल तो फीर हमें किनारे तक ले जाता है

चुभती है तनहाई हमें बड़ी (2)
सांझ जैसे ढलती है आंधेरों में जालीम दिलरुबा
कभी तो शमां बनके आया करो
जलते हुए मकाँ पर

कहेते है खुदा ने कई बार
दो जिस्म और एक जान बनाएं है
हम तो तड़पते रहे गए
जिस्म में जान रख़ने के लिए

रोक सकते तो रोक लेते हम,
कई हज़ार सांसें हमारी
बस्‍स तुम्हारे इंतज़ार में

             रोक सकते तो रोक लेते इन
             अनगीनत लम्हों में तुम्हारी यादें

लेकिन ये नामुमकिन ही होता
खुदा जाने ना सांस,ना लम्हा
ना याद, ना एहसास तुम्हारा हम रोक पाते

             एक अरसा गुजरा हैं
             की आप हमें छू गये
             वो एक ही तो लम्हा लगता है
             की हम जान अपनी गवा गए

छुई मुई से ख्वाब हमारें थे
जो आपकी आँखों मे बसे थे
पलक जो आपने झपके
हकीकत में चूर चूर हो गए.....